भोपाल
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जिन जिलों में पहले डोज़ की पेंडेंसी है, उसे 30 सितम्बर तक सौ फीसदी हासिल करना है। इन जिलों के लिए प्रति दिवस अधिकतम डोज़ लगाने की क्षमता के मान से साप्ताहिक डोज़ लगाने के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इसके साथ ही डेंगू और चिकनगुनिया के मामले भी बढ़ रहे हैं। इसलिए इन मामलों में भी सतर्कता बरतना है और उपचार में किसी तरह की कमी नहीं आने देना है।
मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में वैक्सीनेशन कार्यक्रम की समीक्षा बैठक और डेंगू चिकनगुनिया मामलों की जिलेवार समीक्षा बैठक में सीएम ने कहा कि हमें कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर यह काम पूरा करना है। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री, सीएस, पीएस हेल्थ, डायरेक्टर हेल्थ , सेक्रेटरी मुख्यमंत्री सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। पीएस हेल्थ द्वारा वैक्सीनेशन कार्यक्रम का प्रेजेंटेशन दिया गया।
अब तक यह है प्रदेश में कोविड वेक्सीनेशन की स्थिति
पूरे प्रदेश में कुल 5 करोड़ 6 लाख डोज़ वेक्सीनेशन कार्य पूर्ण चूका है। जिन लोगों को पहला डोज लग चुका है उनकी संख्या 4 करोड़ 10 लाख यानी आबादी का 75 प्रतिशत है। द्वितीय डोज़ 95 लाख 40 हज़ार यानी 17 प्रतिशत लोगों को लगा है। सीएम चौहान ने तय किया है कि 30 सितम्बर 2021 तक प्रदेश में शत प्रतिशत पात्र नागरिकों का प्रथम डोज़ वेक्सीनेशन पूर्ण किए जाएंगे।
वोटर लिस्ट के आधार पर तय करें वैक्सीनेशन
मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलों जहां पर वैक्सीनेशन कम हुआ है वहां के कलेक्टरों से कहा कि वोटर लिस्ट के आधार पर घर-घर शत प्रतिशत वैक्सीनेशन सुनिश्चित किया जाए। इससे लोगों की पहचान करने में आसानी होगी कि किसे वैक्सीन लग चुका है और किसे नहीं लगा है। बैठक में मुख्यमंत्री ने 17 सितंबर को आयोजित होने वाले वैक्सीनेशन अभियान की जानकारी दी।
इन जिलों में डेंगू से दिक्कत
सीएम चौहान ने डेंगू निराकरण के लिए मंदसौर, जबलपुर, रतलाम, आगर मालवा, भोपाल, छिंदवाड़ा, इंदौर जिलों में प्रशासन विशेष ध्यान देने के लिए कहा।
भोपाल कलेक्टर ने बताया कि 11 वार्ड प्रभावित डेंगू से
प्रभावित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डेंगू से बचाव के लिए अवेयरनेस कैंपेन चलाएं, जन जागरण अभियान चलाएं। वह खुद भी 15 सितंबर को इसके लिए लोगों को जागृत करने का काम करेंगे।
ये महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए
-शासकीय चिकित्सालयों में फीवर क्लिनिक का क्रियान्वयन तेजी से शुरू हो एवं नियमित समीक्षा करें।
-ओपीडी में शीघ्र परीक्षण एवं डेंगू की जांच के लिए सुविधा की मॉनिटरिंग करते रहें।
-डेंगू के रोगियों के उपचार हेतु जिला अस्पतालों में 10 बिस्तर का आइसोलेशन वार्ड सुनिश्चित किया जाए।
-भारत सरकार की स्टैण्डर्ड ट्रीटमेंट अनुसार डेंगू का लाक्षणिक उपचार की व्यवस्था की गई है।
-जिलों में कलेक्टर रैपिड रिस्पांस टीमों का गठन करें।
-अतिरिक्त दल गठित कर रैपिड फीवर सर्वे एवं वेक्टर कंट्रोल गतिविधियां शुरू करें।
-प्रभावित क्षेत्र में वाहक मच्छरों की वृद्धि के स्रोत में कमी लाने हेतु प्रयास किये जाएं।
-7 दिनों से अधिक समय तक किसी भी स्थान पर जलजमाव न हो।
-कूलर, टंकी, खाली प्लाट, गड्डों इत्यादि की नियमित सफाई करते रहें।
- मच्छर के लार्वा शून्य होने तक प्रभावित क्षेत्रों में एंटी लार्वा गतिविधियां चलती रहें।
-लार्वा नियंत्रण हेतु टेमीफोस, बीटीआई जैसे एंटीलार्वल रसायन का उपयोग किया जाए।
-फॉगिंग एवं छिड़काव हेतु पर्याप्त मात्रा में क्रियाशील कम्प्रेसर पंप, फॉगिंग मशीन इत्यादि की उपलब्धता बनाएं।
-प्रभावित क्षेत्रों में रसायन साइफेनोथ्रिन 5 प्रतिशत द्वारा आउटडोर फॉगिंग कार्य किये जाएं।
-कीटनाशक पायरेथर्म 2 प्रतिशत द्वारा डेंगू पॉजिटिव रोगी के घर के आसपास 400 मीटर के क्षेत्र में स्थित 50 घरों में स्पेस स्प्रे कराएं।
-आमजन को पूरी बांह के कपड़े तथा बुखार प्रभावित रोगियों को एलएलआईएन/बेड नेट का प्रयोग करने की सलाह दें।
-डेंगू रोग से बचाव एवं नियंत्रण संबंधित गतिविधियों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
-लार्वा सर्वे एवं फोगिंग कार्य हेतु ग्रामीण क्षेत्रो में आशा,आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत कर्मी तथा शहरी क्षेत्रो में नगरीय प्रशासन, नगर पालिक, निगम का सहयोग लें।
जिले में आयुष्मान भारत अंतर्गत डेंगू के रोगियों का निशुल्क उपचार की व्यवस्था करें।
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