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अजब-गजब...अफसर ने कहा, आप वकील हो, इसलिए सूचना का अधिकार की पात्रता नहीं

भोपाल
प्रदेश में सूचना के अधिकार के अंतर्गत जानकारी नहीं देने से बचने का अनूठा मामला सामने आया है। सतना नगर निगम ने एक वकील को यह कहकर आरटीआई में जानकारी देने से इनकार कर दिया है क्योंकि संबंधित आवेदन कर्ता पेशे से वकील है और मुवक्किल से फीस प्राप्त कर न्यायालय में विधिक पैरवी करता है। इस अजब-गजब मामले में अब जानकारी न मिलने से वरिष्ठ अधिकारी के यहां अपील करने की तैयारी की जा रही है।

सतना नगर निगम के सहायक लोक सूचना अधिकारी ने इसी माह आवेदक को जो जानकारी दी है, वह निगम के प्रभारी राजस्व निरीक्षक के हवाले से उपलब्ध कराई गई है। इसमें कहा गया है कि 31 जनवरी 2022 को बृजेश कुमार पाठक एडवोकेट जिला न्यायालय सतना द्वारा जो जानकारी आरटीआई में मांगी गई है वह सूचना के अधिकार के अंतर्गत नहीं दी जा सकती है। इसमें कहा गया है कि सूचना के अधिकार 2005 के अंतर्गत नागरिक को सूचना प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। कोई भी व्यक्ति इसका लाभ ले सकता है, भले ही वह कृत्रिम व्यक्ति क्यों न हो? इसमें यह हवाला देते हुए जानकारी देने से मना किया गया है कि कोई भी संगठन, संघ, प्रतिष्ठान, एसोसिएशन, एडवोकेट नागरिक शब्द की परिभाषा में नहीं आता है। इसलिए एडवोकेट जो कि काउंसिल में रजिस्टर्ड होने पर विधिक व्यवसाय करता है तथा अपने मुवक्किल के पक्ष में फीस लेकर न्यायालय विधिक पैरवी करता है, वह इसके दायरे में नहीं आता है। नगर निगम की ओर से यह भी कहा गया है कि अधिनियम की धारा 24 के अंतर्गत 3 जो 6 उपकंडिकाएं हैं, उसमें अधिवक्ता के बिन्दु क्रमांक दो के अनुरूप जानकारी देने का प्रावधान नहीं है। इसलिए जानकारी नहीं दी जा सकती है।

 
इनका कहना...


संंविधान के अनुच्छेद 19 में भारत के किसी भी नागरिक को वोट डालने और सूचना मांगने का अधिकार है। कानून में कहीं नहीं लिखा है कि जानकारी नहीं दे सकते। देश का कानून सजायाफ्ता को सूचना के अधिकार में जानकारी पाने का संवैधानिक अधिकार देता है तो वकील, डॉक्टर, पत्रकार या किसी अन्य को सूचना पाने से नहीं रोका जा सकता।

 
अजय दुबे, आरटीआई, एक्टिविस्ट

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