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स्पीच के बीच गुल हुई बिजली तो CM को याद आये एनर्जी PS, सीएम बोले आज सुलेमान को चमका दिया

भोपाल

प्रशासन अकादमी में सीएम शिवराज सिंह चौहान के भाषण के दौरान तब आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, एसएएस, एसपीएस, एसएफएस अफ़सर एक साथ हंसने से खुद को नहीं रोक पाए जब सिविल सर्विस डे पर उदबोधन के बीच में बिजली गुल हो गई। यह देख मुख्यमंत्री मुस्कुराते हुए बोले- कोयले का संकट है। ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव का नाम लेकर पूछा- संजय दुबे हैं क्या...? CM के इस अंदाज पर प्रोग्राम में मौजूद अधिकारी हंसी नहीं रोक पाए। बाद में सीएम ने कहा कि दुबे कल ही कह रहे थे कि कोयले की रैक दिलवा दें। बाद में उन्होंने अफसरों से पूछा कि क्या आप सुन पा रहे हैं? अफसरों ने हां में सिर हिलाया तो सीएम ने कहा कि हां में हां नहीं मिलाते रहना है। जब लाइट ही नहीं है तो कहां से सुन पा रहे होंगे। दस मिनट तक बिजली गुल रही और सीएम का संबोधन चलता रहा।मुख्यमंत्री ने अफसरों से कहा कि वे अपने काम का मूल्यांकन करें और बेहतर रिजल्ट देने की कोशिश करें। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों की जिंदगी बदलने का सौभाग्य जन सेवकों और लोक सेवकों को प्राप्त है। वह अक्सर यह गाना गाते हैं कि अपने लिए जिए तो क्या जिए तू जी ऐ दिल जमाने के लिए ...।


 मैंने आज सुलेमान को चमका दिया

सिविल सर्विस डे पर संबोधन के दौरान सीएम चौहान ने कहा कि कुछ लोग मुझसे प्रताड़ित रहते हैं कि सुबह फोन लगा दिया लेकिन मेरी हर काम बेहतर करने की इच्छा होती है। इसी कड़ी में कोरोना की फिर आमद की स्थिति को देख आज सुबह सुलेमान (एसीएस हेल्थ मो सुलेमान) को चमका दिया। कोरोना को लेकर व्यवस्थाएं चाक चौबंद रखने के निर्देश दिए। 

तय करें खुद अपने को बेहतर कैसे बना सकते हैं

सीएम चौहान ने कहा कि आप अपने काम को खुद और कैसे बेहतर बना सकते हैं? यह तय करें, मैं खुद तय करता हूं कि कल मुझे क्या बेहतर करना है? नया करने की बेचैनी रहती है और वह सभी में होनी चाहिए। आपको अपने काम की प्लानिंग करना होगी। उन्होंने कहा कि लोग दो तरह के होते हैं। पहले वे जिनसे मिलकर मन ऊर्जा से भर जाता है और काम में तेजी आ जाती है और दूसरे वे जो काम को और बिगाड़ने का काम कर देते हैं यानी जिंदा आदमी को मुर्दा कर देते हैं।  उन्होंने कहा कि आप अगर निरुत्साहित हो गए तो कुछ नहीं होगा। निराश होने का हक आपको नहीं है। उत्साह से लगे रहें, आशावादी रहें और विश्वास व उत्साह में भरकर काम करें। 

 दृष्टिकोण पर भी बहुत कुछ निर्भर

मुख्यमंत्री ने अफसरों से कहा कि काम कैसे होगा, यह आपके दृष्टिकोण पर भी निर्भर करता है। इसके लिए  उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए पत्थर तोड़ने वाले मजदूरों की कहानी सुनाई और कहा कि तीन मजदूरों ने अलग दृष्टिकोण बताए। पहले ने कहा कि यह हालत है कि पत्थर तोड़ने पड़ रहे हैं। दूसरे ने कहा कि पेट पालने के लिए ऐसा करना पड़ रहा है और तीसरे ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि मेरे तोड़े गए पत्थर भगवान के मंदिर में लगेंगे। यही दृष्टिकोण हमें आगे ले जाता है। 

दुनिया धर्मशाला है, आज आए कल जाना है

सीएम ने कहा कि यह दुनिया धर्मशाला है। आज आए हैं तो कल जाना ही होगा लेकिन जाने से पहले ऐसा काम कर जाना है कि यादगार बन जाए। आप जब तक हो तो ऐसा काम करें कि आपके योगदान यादगार रहें। एक कलेक्टर पूरे जिले को बदल देता है और एसपी पूरी कानून व्यवस्था बदल देता है। आप अपने आपको तकनीकी और अन्य माध्यमों के जरिये क्षमतावान बनाएं और काम करें। 

दुआएं देने वाली कहानियां 

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि एक दिन वे राजधानी के निजी अस्पताल में पहुंचे तो वहां एक मरीज के माता पिता ने घेर लिया। माता ने कहा कि दो बेटे लीवर खराबी के कारण जान गवां चुके हैं और तीसरा भी मर जाएगा। मैंने अफसरों से बात की और लीवर ट्रांसप्लांट के लिए कहा। इसके बाद दूसरे दिन उसी मां का फोन आया, उसने इतनी दुआएं दी कि मन संतुष्ट हो गया। उन्होंने सिंगरौली के एक युवक द्वारा माला पहनाने का किस्सा भी सुनाया और कहा कि वह जिद पर अड़ा था कि माला पहनाऊंगा। मैं थोड़ा झुंझलाया और बाद में उससे वजह पूछी तो उसने कहा कि मेरे दोनों हाथ नहीं थे। आपने  पिछली बार आकर हाथ लगवाने के लिए कहा था। यह हाथ लग गया है। उसकी दुआओं से भी मन संतुष्ट हो गया।

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