भोपाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खण्डवा जिले के बड़ौदा अहीर में आदिवासी सभा को संबोधित करते हुए आरएसएस, बीजेपी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि वे आदिवासियों को देश का मालिक नहीं मानते बल्कि वनवासी कह कर बुलाते हैं। इसके पीछे बीजेपी की एक सोच है क्योंकि वह आदिवासियों को उनका हक नहीं देना चाहते। अगर मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई तो वनवासी शब्द बैन कर दिया जाएगा और आदिवासियों को सारे अधिकार दिए जाएंगे। यात्रा के तीसरे दिन उन्होंने ओम्कारेश्वर भगवान के दर्शन कर नर्मदा मैया की आरती में हिस्सा लिया।
इसके एक दिन पहले टंट्या मामा के गांव बड़ौदा अहीर में उन्होंने सभा में पीएम मोदी द्वारा आदिवासी को वनवासी कहने के पीछे तर्क देते कहा कि वनवासी कहने का पहला मतलब ये है कि आप पहले मालिक नहीं हो, आप सिर्फ जंगल में रहते हो। दूसरा मतलब कि जंगल के बाहर आपको, वन के बाहर कोई भी आपको अधिकार नहीं मिलना चाहिए और तीसरा मतलब, जो आपको दिख रहा है, जहाँ भी हम देखें, बीजेपी की सरकारें जंगल को उद्योगपतियों को दे रही है। जंगल काटे जा रहे हैं। हिंदुस्तान में जंगल खत्म होते जा रहे हैं, जब इस देश से जंगल खत्म हो जाएंगे, तो फिर आपके लिए इस देश में कोई जगह नहीं बचेगी। इन शब्दों के पीछे विचारधारा है। हम आदिवासी कहते हैं, क्योंकि हम इस बात को मानते हैं कि आप हिंदुस्तान के असली और पहले मालिक हो। वे वनवासी कहते हैं, क्योंकि वो आपके सारे के सारे अधिकार आपसे छीनना चाहते हैं और आपको ये याद नहीं दिलाना चाहते कि आप ही इस देश के पहले और असली मालिक हो। राहुल गांधी ने कहा कि इसलिए सबसे पहले मैं चाहता हूं कि ये जो बीजेपी के लोगों ने आपका अपमान किया है। ये जो शब्द इन्होंने आपके लिए प्रयोग किया है, वनवासी, इसके लिए ये आपसे माफी मांगें। हाथ जोड़कर हिंदुस्तान के आदिवासियों से ये माफी मांगें और उनसे कहें कि आप वनवासी नहीं हो, आप आदिवासी हो और आप हिंदुस्तान के पहले मालिक हो और हम आपको जो भी अधिकार चाहिए, वो देंगे। माफी मांगने के बाद दूसरा काम, जो ये आपसे जंगल छीनते हैं, जो हम पेसा कानून लाए, जमीन अधिग्रहण बिल लाए, फॉरेस्ट राइट एक्ट लाए, इन तीन कानूनों को ये जो कमजोर करते हैं और आपकी जो जमीन है, जो आपसे छीनते हैं, आपका जल है, आपका जंगल है, जो आपसे छीनते हैं, वो आपको वापस देने का काम शुरू कर दें। अगर ये नहीं करेंगे, तो जैसे ही हमारी यहाँ सरकार आएगी, हम आदिवासी शब्द का प्रयोग करेंगे और जो आपके हक हैं, एक के बाद एक, एक के बाद एक आपको देना शुरू कर देंगे।
आदिवासियों के आदर्श टंट्या मामा का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि आज मैं उनके बारे में पढ़ रहा था और मैंने देखा कि वो 26 जनवरी को पैदा हुए थे और वही दिन है, जब हमारे देश का संविधान लागू हुआ। गणतंत्र दिवस का दिन, तांत्या मामा का जन्मदिन था तो इसमें भी एक मैसेज है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले मैंने महाराष्ट्र में एक भाषण किया और उसमें मैंने आदिवासी शब्द के बारे में बोला। आदिवासी का मतलब, जो हिंदुस्तान में सबसे पहले रहते थे। मतलब, जब इस देश में कोई और नहीं था, तब भी आप लोग इस देश में रहते थे। अगर आप आदिवासी हो और अगर आप यहाँ सबसे पहले रहते थे, तो इसका मतलब ये बनता है कि आप इस देश के असली मालिक हो।
राहुल गांधी ने कहा कि ये जो शब्द होते हैं, ये बहुत चीजें छुपाते हैं। बहुत चीजें ये दिखा भी सकते हैं। जैसे आप टंट्या मामा के बारे में सोचें, तो आपके दिमाग में कौन से शब्द आते हैं, जब आप तांत्या मामा के बारे में सोचते हो? आदिवासी आता है, संघर्ष आता है, निडरता आता है, क्रांतिकारी आता है, ये शब्द आते हैं। जब वो अंग्रेजों के सामने फांसी पर चढ़ रहे थे, तो आपको क्या लगता है, उनके दिल में डर था या नहीं? उनके दिल में डर नहीं था। उसका कारण क्या था? जब वो चढ़े फांसी पर, उनके दिल में डर क्यों नहीं था, क्योंकि उनके डर को, जो उनके दिल में आपके लिए प्यार था, उसने मिटा दिया था। तो जब हम उनके बारे में सोचते हैं, हमारे दिमाग में ये शब्द आते हैं। निडर, संघर्ष, मोहब्बत, ये शब्द आते हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि मैं आपसे पूछता हूँ, नोटबंदी से आपको फायदा हुआ या नुकसान? जीएसटी, नोटबंदी और कोरोना के समय जो सरकार ने किया, दलितों को, पिछड़ों को, आदिवासियों को, किसानों को, मजदूरों को उन्होंने चोट मारी। मैं भाषणों में कहता हूँ, ये पॉलिसियाँ नहीं थी, ये हथियार हैं।
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