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सावधान : अफसर, कर्मचारी के पदों की मैपिंग करा रही सरकार, ड्यूटी से गायब तो सोशल आडिट से देगी रिपोर्ट

  भोपाल

प्रदेश में अब हर उस अधिकारी कर्मचारी पर सरकार नजर रख सकेगी जो फील्ड में पदस्थ रहने के दौरान ड्यूटी में नहीं जाता है या गांव-कस्बे में किसी दफ्तर का कोई पद रिक्त है और उसकी जानकारी स्थानीय अफसर छिपा रहे हैं। इसके लिए वित्त विभाग द्वारा कराई जा रही अफसरों, कर्मचारियों की मैपिंग से भोपाल में बैठे अफसरों को पूरी डिटेल मिल सकेगी। फायनेंस के साफ्टवेयर में किए जा रहे इस बदलाव का असर अगले साल से दिखने लगेगा। इतना ही नहीं किसी कर्मचारी-अधिकारी के कितने बार ट्रांसफर हुए और वह फिर ट्रांसफर के लिए आवेदन करेगा तो इसकी जानकारी भी सरकार के संबंधित विभागों को सीधे मिल जाएगी। 


वित्त विभाग द्वारा इसके लिए प्रदेश के सभी आहरण संवितरण अधिकारियों के जरिये विभागों के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मौजूद दफ्तरों और वहां स्वीकृत व रिक्त पदों की मैपिंग कराने का काम किया जा रहा है। इस मैपिंग के बाद यह पता चल जाएगा कि किस विभाग का कौन सा अधिकारी कर्मचारी कितने साल से संबंधित दफ्तर में पदस्थ है। अगर पदस्थापना के दौरान कोई अफसर कर्मचारी गायब रहता है व सिर्फ वेतन लेने आता है तो साफ्टवेयर में की गई कम्प्लेन की व्यवस्था के जरिये सोशल आडिट से इसकी रिपोर्ट शासन तक पहुंचेगी और एक्शन लिया जा सकेगा। वित्त विभाग द्वारा टेÑजरी से वेतन पाने वाले कर्मचारियों अधिकारियों की लोकल आॅफिस मैपिंग का कार्य डीडीओ के अधीन कार्य कर रहे कार्यालयों की एंट्री कराकर किया जा रहा है। 

डॉक्टर, पटवारी, पंचायत सचिव, शिक्षक की मिलेगी रिपोर्ट

पदों की मैपिंग कराने का फायदा यह होगा कि अगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ कोई डॉक्टर, प्राथमिक या माध्यमिक स्कूल में पदस्थ शिक्षक, पटवारी हल्के में पदस्थ पटवारी, पंचायत का सचिव सिर्फ वेतन लेता है और पदस्थापना स्थल पर नहीं जाता तो उसकी जानकारी सिंगल क्लिक के जरिये शासन को हो सकेगी। ऐसे लोगों की जहां से तनख्वाह निकलती है वहां जाकर काम करना होगा। सोशल आडिट और अन्य तरीकों से उसकी रिपोर्ट शासन तक पहुंचेगी जिसके बाद एक्शन लिया जा सकेगा। 

पदों की वास्तविक स्थिति भी मिलेगी

वित्त विभाग के सचिव ज्ञानेश्वर पाटिल बताते हैं कि अभी कई विभागों द्वारा फील्ड के दफ्तरों में रिक्त पदों की जानकारी समय पर और सही तरीके से नहीं भेजी जाती। डीडीओ द्वारा पदों की मैपिंग किए जाने का फायदा यह होगा कि हर पद की जानकारी आ जाएगी और शासन को रिक्त पदों पर पदस्थापना करने में आसानी होगी। गांवों में शिक्षकविहीन स्कूल नहीं होंगे और स्कूल गायब होने की स्थिति नहीं बनेगी। डीडीओ की रिपोर्ट आने के बाद वित्त विभाग की जानकारी को अपडेट कराने का काम एक बार संबंधित विभागों से भी कराया जाएगा और इसके बाद सरकार ऐसे मामलों में एक्शन ले सकेगी। 

अभी इन कर्मचारियों की जानकारी रहेगी शेष

वित्त विभाग के द्वारा शुरू कराई जा रही इस नई व्यवस्था के फायदे बताते हुए विभाग के सचिव ज्ञानेश्वर पाटिल बताते हैं कि जिन स्वायतशासी संस्थाओं के कर्मचारी अधिकारी के भुगतान चेक के जरिये होते हैं या जो दफ्तर, संस्थान कोषालय के जरिये पेमेंट नहीं देते हैं, अभी उनके कर्मचारी अधिकारी इस व्यवस्था से नहीं जुड़ेंगे। ऐसे दफ्तरों में मार्कफेड, नागरिक आपूर्ति निगम, नगरीय निकाय, जिला पंचायत, सहकारी बैंक समेत अन्य ऐसे दफ्तर शामिल हैं। इनके मामले में भी जल्द कोई न कोई फैसला किया जाएगा। 

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