राहुल गांधी सहित पूरी कांग्रेस पार्टी हर मंच से एक बात कहती है कि अभिव्यक्ति की आजादी को छीना जा रहा है। हमें बोलने नहीं दिया जा रहा है, देश में लोकतंत्र खतरे में है, अभिव्यक्ति की आजादी खतरे में है, देश में भय और डर का माहौल है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर के खिलाफ छत्तीसगढ़ में मामला दर्ज किया गया है एक ट्वीट करने पर जबकि वह वीडियो पब्लिक डोमेन में है जिसमें हमारे दुश्मन देश के जिंदाबाद के नारे लग रहे हैं, मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा मामला दर्ज किया गया है और मध्य प्रदेश की पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि उस वीडियो में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे किसने लगाए हैं। उस वीडियो की सत्यता की जांच भी मध्य प्रदेश पुलिस कर रही है, जब मध्य प्रदेश पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था तो छत्तीसगढ़ में मीडिया प्रभारी के खिलाफ मामला दर्ज करना क्या उचित है?
एक तरफ आप लोकतंत्र एवं अभिव्यक्ति की आजादी की दुहाई दे रहे हैं, उसके उलट एक भाजपा मीडिया प्रभारी के खिलाफ अपनी सरकार का दुरुपयोग करते हुए मामला दर्ज कर रहे हैं। इस कदम से कहीं न कहीं यह सिद्ध हो रहा है कि कांग्रेस पार्टी फिर पिछले दरवाजे से इमरजेंसी लागू करने का प्रयास कर रही है और लोगों को, मीडिया कर्मियों को धमकाने का प्रयास किया जा रहा है कि अगर आपने कांग्रेस के बारे में कुछ कहा तो आप के खिलाफ कांग्रेस शासित प्रदेश में एफआईआर दर्ज होगी। कांग्रेस का यह कदम समाज में भय का माहौल बना रहा है। कोई आश्चर्य नहीं होगा कि भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर के खिलाफ राजस्थान में भी मामला दर्ज हो जाए क्योंकि वहां भी कांग्रेस की सरकार है, कांग्रेस पार्टी के सुप्रीम नेतृत्व में शामिल नेता सेना प्रमुख को सड़क का गुंडा कहते हैं, देश के प्रधानमंत्री को चोर कहते हैं, खून का दलाल कहते हैं और जब पाकिस्तान पर सर्जिकल और एयर स्ट्राइक होती है तो उस पर देश की सरकार और सेना से सबूत मांगते हैं। लगातार हिंदू को टारगेट करते हुए कांग्रेस के नेताओं के विवादित बयान आ रहे हैं। दिल्ली बाटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए आतंकवादियों को मासूम होने का तमगा देते हैं और इन काउंटर को फर्जी घोषित करते हैं जबकि दिल्ली प्रदेश और केंद्र में कांग्रेस की सरकार रहती है। भोपाल में जेल तोड़कर भागे 8 सिमी के लोगों को मासूम घोषित कर एनकाउंटर को फर्जी घोषित करने का प्रयास किया जाता है। यह सब कांग्रेस के नेता देश में बोलते हैं उसके बाद अभिव्यक्ति की आजादी की दोहाई दी जाती है। लंबे समय से मीडिया के क्षेत्र में काम करने वाले वरिष्ठ पत्रकार युवा लोकेंद्र पाराशर को यह भली-भांति ज्ञान है कि किस विषय में बोलना है और कितना। कांग्रेस के नेता सेना पर टिप्पणी करते हैं, कांग्रेस के नेता सेना से हिसाब मांगते हैं, कांग्रेस के नेता देश के प्रधानमंत्री को चोर कहते हैं और अगर भारतीय जनता पार्टी का मीडिया प्रभारी एक ट्वीट कर देता है तो कांग्रेस के सारे नेता तिलमिला जाते हैं और उसके खिलाफ मामला दर्ज करवा देते हैं। यह कदम आज मीडिया से जुड़े हुए वरिष्ठ पत्रकार मीडिया बंधुओं के साथ रहने वाले लोकेंद्र पाराशर की अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने और छीनने वाला कदम नहीं है क्या? राहुल गांधी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के इशारे पर यह जो कदम उठाया गया है यह अभिव्यक्ति की आजादी को छीनने वाला और कुचलने वाला है और कहीं न कहीं आज देश की जनता एक-एक कर प्रदेशों से कांग्रेस को नकार रही है क्योंकि जनता अब कांग्रेस के घड़ियाली आंसुओं को बेहतर तरीके से जानने लगी है कि कांग्रेस के दिखाने के दांत अलग हैं और खाने के अलग। अभिव्यक्ति की हत्यारे कांग्रेस के नेतृत्व को तुरंत वरिष्ठ पत्रकार लोकेंद्र पाराशर पर दर्ज मामला वापस लेना चाहिए और पूरे देश से माफी मांगना चाहिए।
(लेखक भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं)
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