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12 साल से चिट्ठी लिख रहा वित्त विभाग, बगैर अनुमति खोले खातों को बंद नहीं करा रहे अफ़सर

भोपाल
राज्य सरकार प्रदेश के सरकारी महकमों में जिला कार्यालयों द्वारा वित्त विभाग की सहमति बगैर खोले गए खातों को बंद कराने में नाकाम रही है। पिछले 12 सालों में सरकार इसे लेकर जब तब पत्राचार कर रही है लेकिन जिलों के अधिकारी इसको लेकर गंभीर नहीं हैं और सरकार के आदेश पर खाते बंद कर वित्त विभाग की सहमति से संचालित खातों में राशि जमा नहीं कर रहे हैं।

 

ताजा मामला आदिम जाति कल्याण विभाग से जुड़ा है। आदिवासी आयुक्त ने सभी संभागीय उपायुक्तों, सहायक आयुक्तों और जिला संयोजकों को पत्र लिखकर कहा है कि वित्त विभाग की अनुमति के बगैर खोले गए बैंक खातों में जमा राशि राज्य के खाते में जमा करने के निर्देश का पालन करें। 20 जनवरी को जारी निर्देश में कहा गया है कि आयुक्त आदिवासी विकास कार्यालय द्वारा वित्त विभाग के आदेश के परिप्रेक्ष्य में कहा गया है कि कोषालय से प्राप्त किए जाने वाले भुगतान ई भुगतान के जरिये सीधे हितग्राहियों, सेवा प्रदाताओं, संस्थाओं, एजेंसी के बैंक खाते में जमा किए जाएं। ई भुगतान की राशि पूर्व से खोले गए बैंक खातों में जमा करना गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आएगा। इन निर्देशों के बाद भी अभी तक कई विभाग के आहरण संवितरण अधिकारियों द्वारा बगैर अनुमति संचालित बैंक खाते बंद नहीं किए गए हैं। ऐसा करना शासन के आदेश की अवहेलना करने की परिधि में आता है। इसलिए सभी को निर्देशित किया जाता है कि ऐसे खातों को तत्काल बंद कर जमा राशि राज्य शासन के खाते में जमा कराएं और इसकी जानकारी कार्यालय को उपलब्ध कराएं। 


ऐसे हुआ साल दर साल पत्राचार

 
सूत्रों के अनुसार आयुक्त आदिवासी विकास द्वारा वित्त विभाग के निर्देशों के परिपालन में 10 फरवरी 2009, बाइस अक्टूबर 2013, चौबीस मार्च 2016, छब्बीस जुलाई 16, बीस सितम्बर 16, चार फरवरी 2017, सात मार्च 2017, छब्बीस अप्रेल 17 और 27 जुलाई 17 को इस संबंध में पत्राचार किया है लेकिन अभी तक खातों के बंद होने की जानकारी नहीं मिली है। 


इस फार्मेट में मांगी जानकारी

 
आयुक्त आदिवसी विकास ने जिलों और संभागों के अधिकारियों से 10 फरवरी 2009 के बाद बैंक खातों में चालान से जमा की गई राशि का विवरण, बैंक खाते की पूरी डिटेल, खाता बंद करने की तारीख, बंद होने की तिथि तक जमा राशि, शासन के खाते में जमा की गई राशि का ब्यौरा एक फार्मेट में देने के लिए कहा है। साथ ही वर्तमान में जो खाते वित्त विभाग की अनुमति के बिना संचालित हैं, उनकी भी पूरी डिटेल और खातों में जमा राशि का ब्यौरा मांगा गया है।
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