भोपाल
ऊर्जा विभाग ने कोरोना के कारण दो सालों से गैर घरेलू और निम्नदाब उपभोक्ताओं के काटे गये बिजली कनेक्शन चालू करने विशेष योजना शुरू की है। बकाया नहीं चुकाने के कारण काटे गए कनेक्शन शुरू करने के लिए लागू यह योजना एक साल तक चलेगी जिसमें कनेक्शन काटने की कार्यवाही के दायरे में आए ऐसे उपभोक्ता लाभ ले सकेंगे जो शासन की योजना के मुताबिक बकाया राशि जमा कर दोबारा कनेक्शन चालू कराना चाहते हैं। योजना में प्राप्त आवेदनों पर निर्णय लेने का अधिकार विद्युत वितरण कंपनी के क्षेत्रीय मुख्य अभियंता को रहेंगे। किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में कंपनी के कॉपोर्रेट कार्यालय में गठित समिति, जिसमें निदेशक/मुख्य महाप्रबंधक (वाणिज्य), मुख्य वित्तीय अधिकारी एवं क्षेत्रीय मुख्य अभियंता रहेंगे।
इस योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता को स्टांप पेपर पर एफीडेविट देना होगा कि उपभोक्ता द्वारा योजनानुसार 25 प्रतिशत राशि एक मुश्त भुगतान की जाएगी और कनेक्शन जोड़ने के बाद शेष राशि की 6 किस्तों में दी जाएगी। साथ ही मासिक देयकों का भुगतान निर्धारित समयावधि में करना होगा। किस्तों का या मासिक देयकों का या दोनों का भुगतान निर्धारित समयावधि में नहीं करने पर विद्युत कनेक्शन काटा जा सकेगा एवं उपभोक्ता को नियमानुसार सरचार्ज भी देना होगा। किसी भी माह चालू बिल एवं किस्त की राशि नियत दिनांक तक जमा नहीं होने पर उपभोक्ता का कनेक्शन 15 दिन का नोटिस देकर काटा जा सकेगा। इसके लिए संबंधित सर्किल महाप्रबंधक को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
विभाग द्वारा कहा गया है कि योजना में ऐसे समस्त उच्चदाब, एल.वी.-2 एवं एल.वी.-4 श्रेणी के स्थाई रूप से काटे गए कनेक्शन के उपभोक्ता शामिल हो सकते हैं जो अपने कनेक्शन भार में परिवर्तन तथा पुनसंर्योजन का प्रयोजन बदलना चाहते हैं, वे भी इस योजना के लिए पात्र रहेंगे। कनेक्शन के लिए उपभोक्ताओं को नवीन अनुबंध करना होगा। साथ ही नियामक आयोग द्वारा जारी आदेशानुसार सप्लाई अफोर्डिंग चार्जेस भी देना होगा। अगर उपभोक्ता की अमानत राशि का समायोजन बकाया राशि में कर लिया गया हो तो उसे नवीन अमानत राशि नियमानुसार जमा करनी होगी।
यदि कोई उपभोक्ता योजना में कम संविदा मांग (जो संबंधित वोल्टेज के लिए निर्धारित न्यूनतम संविदा मांग से कम नहीं होगी) अथवा बढ़ी हुई संविदा मांग लिए विद्युत प्रदाय लेना चाहता है तो उसे नए अनुबंध में विद्युत प्रदाय संहिता के प्रावधानों के अनुसार कम अथवा बढ़ी हुई संविदा मांग स्वीकृत की जा सकेगी। इस स्थिति में उपभोक्ता द्वारा नियामक आयोग द्वारा जारी आदेशानुसार सप्लाई अफोर्डिंग चार्जेस देना होगा। बढ़ी हुई संविदा मांग के लिए यदि ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि या नवीन लाईन का निर्माण, कंडक्टर बदलने आदि की आवश्यकता हुई तो उसका खर्च उपभोक्ता को स्वयं वहन करना होगा। इसके लिए नियामक आयोग द्वारा जारी आदेश लागू होगा।
यदि योजना अवधि में कोई विच्छेदित उच्चदाब, एल.वी.-2 एवं एल.वी.-4 श्रेणी के उपभोक्ता अपनी इकाई का हस्तांतरण किसी अन्य के लिये व्यक्ति अथवा कंपनी को करता है, तो विद्युत प्रदाय करने के लिए उपरोक्त सुविधाएं नये उपभोक्ता को प्राप्त हो सकेंगी बशर्ते कि उसमें पूर्व उपभोक्ता की सहमति हो तथा नये एवं पूर्व उपभोक्ता द्वारा उपरोक्त दायित्व वहन करने के लिए अंडरटेकिंग दी गई हो। उन्हें कंपनी के नियमानुसार नवीन संयोजन के लिए अनुबंध निष्पादित करना होगा। योजना का लाभ उपभोक्ताओं को योजना अवधि में केवल एक बार ही मिलेगा।